
कोलकाता/सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ पुलिस ने एक एफआईआर (FIR) दर्ज की है। सिलीगुड़ी पुलिस ने बुधवार को इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह मामला एक वकील की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। ममता बनर्जी पर मुख्य रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समाज में तनाव पैदा करने वाले बयान देने के आरोप लगे हैं
शुरू में पुलिस ने मना किया, बार-बार के प्रयास के बाद दर्ज हुई FIR
यह शिकायत सिलीगुड़ी की एक महिला वकील रिंकी चट्टोपाध्याय सिंह ने दर्ज कराई है। उन्होंने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज करवाया। शिकायतकर्ता वकील का आरोप है कि जब वह शुरुआत में इस मामले को लेकर पुलिस के पास पहुंची थीं, तो पुलिस ने केस दर्ज करने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद उन्हें बार-बार पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़े और कड़े फॉलो-अप के बाद आखिरकार पुलिस को यह एफआईआर स्वीकार करनी पड़ी।
“करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था को पहुंची ठेस”
शिकायत में ममता बनर्जी के दो पुराने बयानों का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता वकील के मुताबिक, बनर्जी की इन दो टिप्पणियों ने न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों सनातनी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं और गहरी आस्था को चोट पहुंचाई है।
आरोप है कि इनमें से एक टिप्पणी वर्ष 2025 में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान की गई थी, जबकि दूसरा बयान विधानसभा चुनावों से पहले कोलकाता के धर्मतला में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया था।
“एक समुदाय दूसरे को 5 मिनट में खत्म कर सकता है” – बयान पर बवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि शिकायत में इन बयानों को पूरी तरह से असंवैधानिक और भड़काऊ माना गया है।
“ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा था कि अगर कोई खास समुदाय चाहे, तो वह महज पांच मिनट के भीतर दूसरों को ‘खत्म’ कर सकता है। जब कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री जैसे बेहद गरिमामय और संवैधानिक पद पर बैठा हो, तो उससे समाज में इस तरह की नफरत या डर फैलाने वाले बयानों की उम्मीद कतई नहीं की जा सकती।”
शिकायतकर्ता, रिंकी चट्टोपाध्याय (वकील)
इन गंभीर धाराओं में फंसा पेंच
कानूनी तौर पर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पुलिस ने इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं:
धारा 351: आपराधिक धमकी देना।
धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किसी का अपमान करना।
धारा 353: समाज में अफवाह या गलत बयान फैलाना।
धारा 354: ईश्वरीय नाराजगी या पाप का डर दिखाकर किसी को धमकाना।
धारा 356: आपराधिक मानहानि का मामला।
धारा 299: किसी की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से ठेस पहुंचाना।
पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?
सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के एक बेहद सीनियर अधिकारी ने इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा, “हमें लिखित शिकायत मिली थी, जिसके बाद तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मामला दर्ज कर लिया गया है। केस की जांच शुरू हो चुकी है और एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों और पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।” इस एफआईआर के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानों का दौर और सियासी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है।



